all about resistance , विध्युत प्रतिरोध के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी 1 ही पोस्ट मे ।

resistance – प्रतिरोध किसी पदार्थ का एक गुण होता है जो किसी कार्य के होने का विरोध करता है । इस पोस्ट मे हम जानेंगे – प्रतिरोध क्या होता है ,प्रतिरोध का सूत्र , प्रतिरोध के प्रकार, प्रतिरोध के उपयोग , प्रतिरोध को कम करने के तरीके ओर प्रतिरोध को बढ़ाने के तरीके ।

all about resistance
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विद्युत प्रतिरोध क्या होता है । what is resistance

विद्युत प्रतिरोध एक विद्युत परिपथ में विद्युत धारा प्रवाह के विरोध की माप है। यह किसी भौतिक पदार्थ के द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह में उत्पन्न बाधा को दर्शाता है। प्रतिरोध को ओम में मापा जाता है, जिसका प्रतीक ओमेगा (Ω) है।

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प्रतिरोध की परिभाषा

किसी चालक के सिरों के बीच विभवान्तर तथा उससे प्रवाहित विद्युत धारा के अनुपात को उसका विद्युत प्रतिरोध (electrical resistance) कहते हैं।

प्रतिरोध का सूत्र

R = V / I

जहाँ, R = प्रतिरोध (ओम में) , V = विभवान्तर (वोल्ट में) , I = विद्युत धारा (एम्पीयर में)

प्रतिरोध की विमायें – [R] = [M L^2 T^3 I^-2]

प्रतिरोध के प्रकार type of resistance

प्रतिरोध को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है।

ओमिक प्रतिरोध ohmic resistance

यह ohm के नियम का अनुपालन करता है । ओमिक प्रतिरोध वह प्रतिरोध होता है जो विद्युत धारा के प्रवाह के साथ समानुपाती होता है। इसका मतलब यह है कि यदि विद्युत धारा दोगुनी हो जाती है, तो प्रतिरोध भी दोगुना हो जाएगा। ओमिक प्रतिरोध वाले पदार्थों को ओमिक पदार्थ कहते हैं।

गैर-ओमिक प्रतिरोध non-ohmic resistance

यह ohm के नियम का अनुपालन नहीं करता है ।गैर-ओमिक प्रतिरोध वह प्रतिरोध होता है जो विद्युत धारा के प्रवाह के साथ समानुपाती नहीं होता है। इसका मतलब यह है कि यदि विद्युत धारा दोगुनी हो जाती है, तो प्रतिरोध दोगुना नहीं हो सकता है। गैर-ओमिक प्रतिरोध वाले पदार्थों को गैर-ओमिक पदार्थ कहते हैं।

प्रतिरोध के उपयोग use of resistance

प्रतिरोध का उपयोग आवश्यकता के अनुसार कई विद्युत परिपथों में अलग अलग तरह से किया जाता है, जिनमें शामिल हैं।

  • विद्युत धारा को नियंत्रित करने के लिए – प्रतिरोध का उपयोग विद्युत धारा को कम करने या बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
  • विद्युत ऊर्जा को गर्मी में बदलने के लिए – प्रतिरोध का उपयोग विद्युत ऊर्जा को गर्मी में बदलने के लिए किया जा सकता है।
  • विद्युत उपकरणों को सुरक्षित करने के लिए – प्रतिरोध का उपयोग विद्युत उपकरणों को सुरक्षित करने के लिए किया जा सकता है।

प्रतिरोध के कुछ उदाहरण

  • विद्युत बल्ब: विद्युत बल्ब में एक फिलामेंट होता है जो प्रतिरोध प्रदान करता है। जब फिलामेंट में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो यह गर्म हो जाती है और प्रकाश उत्पन्न करती है।
  • हीटर: हीटर में एक प्रतिरोधक होता है जो विद्युत ऊर्जा को गर्मी में बदलता है।
  • सर्किट ब्रेकर: सर्किट ब्रेकर में एक प्रतिरोधक होता है जो विद्युत धारा को सीमित करता है। यदि विद्युत धारा बहुत अधिक हो जाती है, तो प्रतिरोधक जल जाता है और सर्किट को बंद कर देता है।

चालक के प्रतिरोध को कम करने के तरीके

कुछ तरीको से प्रतिरोध को कम किया जा सकता है ।

  • चालक का क्षेत्रफल बढ़ाना – चालक का क्षेत्रफल बढ़ाने से प्रतिरोध कम हो जाता है।
resistance depends on length
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  • चालक की लंबाई कम करना – चालक की लंबाई कम करने से प्रतिरोध कम हो जाता है।
  • चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता कम करना – चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता कम करने से प्रतिरोध कम हो जाता है।

प्रतिरोध को बढ़ाने के तरीके

प्रतिरोध को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जाते है जो इसे कम करने के तरीको के ठीक विपरीत होते है ।

  • चालक का क्षेत्रफल कम करना – चालक का क्षेत्रफल कम करने से प्रतिरोध बढ़ जाता है।
  • चालक की लंबाई बढ़ाना – चालक की लंबाई बढ़ाने से प्रतिरोध बढ़ जाता है।
  • चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता बढ़ाना – चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता बढ़ाने से प्रतिरोध बढ़ जाता है।

प्रतिरोधक क्या होता है । what is resister

जब किसी परिपथ मे धारा बहाव को नियंत्रित करने की जरूरत होती है तो किसी अधिक प्रतिरोध वाले पदार्थ को वांछित मान का विरोध उत्पन्न करने के लिए पुर्जे का रूप दे दिया जाता है । तो वह प्रतिरोधक कहलाता है , यह उच्च प्रतिरोध मान के यूरेका तार का हो सकता है, या कार्बन से बना हुआ हो सकता है ।

तो हम इसे इस प्रकार समझ सकते है कि प्रतिरोधक एक विद्युत उपकरण है जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। यह एक चालक के माध्यम से विद्युत धारा के प्रवाह को सीमित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

प्रतिरोधक का उपयोग विद्युत परिपथों में विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि वोल्टेज को विभाजित करना, धारा को सीमित करना, और शक्ति को नियंत्रित करना।

प्रतिरोधक का मुख्य कार्य विद्युत धारा के प्रवाह को सीमित करना है। प्रतिरोधक के माध्यम से विद्युत धारा के प्रवाह में प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का रूपांतरण होता है। यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में मुक्त होती है, जिससे प्रतिरोधक गर्म हो जाता है। आधुनिक इलेक्ट्रोनिक प्रकार के प्रतिरोधों मे यह गर्मी नहीं देखी जाती है ।

प्रतिरोधक को उनके प्रतिरोध के मान के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। प्रतिरोध का मान ओम (Ω) में मापा जाता है।

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1 ओहम का क्या मतलब होता है , 1 ohm mean –

एक ओम का अर्थ है कि जब एक वोल्ट का विभवान्तर एक प्रतिरोधक के सिरों पर लगाया जाता है, तो एक एम्पियर की धारा प्रवाहित होती है।

प्रतिरोधक को उनके आकार और आकार के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। प्रतिरोधक विभिन्न आकारों और आकारों में उपलब्ध हैं, जिनमें गोल, आयताकार, और बेलनाकार शामिल हैं।

प्रतिरोधक का उपयोग , use of resister

प्रतिरोधक का उपयोग विद्युत परिपथों में विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि

  • वोल्टेज को विभाजित करना: एक प्रतिरोधक का उपयोग दो या दो से अधिक बिंदुओं के बीच वोल्टेज को विभाजित करने के लिए किया जा सकता है।
  • धारा को सीमित करना: एक प्रतिरोधक का उपयोग विद्युत परिपथ में विद्युत धारा को सीमित करने के लिए किया जा सकता है।
  • शक्ति को नियंत्रित करना: एक प्रतिरोधक का उपयोग विद्युत परिपथ में शक्ति को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

प्रतिरोधक का उपयोग विभिन्न प्रकार के उपकरणों और उपकरणों में किया जाता है, जैसे कि

  • रेडियो
  • पंखे , कूलर
  • टेलीविजन
  • कंप्यूटर
  • इलेक्ट्रिक मोटर
  • इलेक्ट्रिक हीटिंग उपकरण

प्रतिरोधक के उपयोग मे क्या क्या सावधानीय रखनी चाहिए

प्रतिरोधक का उपयोग करने से पहले, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिपथ के लिए उपयुक्त है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध बहुत अधिक होने पर, यह परिपथ में धारा को सीमित कर सकता है, जिससे उपकरण क्षतिग्रस्त हो सकता है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध बहुत कम होने पर, यह परिपथ में बहुत अधिक धारा प्रवाहित कर सकता है, जिससे आग लग सकती है।

प्रतिरोधक का उपयोग करते समय, यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि प्रतिरोधक को सुरक्षित तरीके से स्थापित किया गया है। प्रतिरोधक को हमेशा उचित रेटिंग वाले विद्युत परिपथ में स्थापित किया जाना चाहिए। प्रतिरोधक को हमेशा गर्मी से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह गर्म होने पर आग का कारण बन सकता है।

प्रतिरोधक एक महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है। प्रतिरोधक का उपयोग करते समय, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिपथ के लिए उपयुक्त है और प्रतिरोधक को सुरक्षित तरीके से स्थापित किया गया है।

विशिष्ट प्रतिरोध क्या होता है , what is resistivity

विशिष्ट प्रतिरोध को प्रतिरोधकता भी कहा जाता है, किसी पदार्थ के प्रतिरोध का एक माप है। इसे उस चालक के इकाई क्षेत्र के प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसकी लंबाई 1 मीटर है तो अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1 वर्ग मीटर होता है।

विशिष्ट प्रतिरोध का SI मात्रक ओम-मीटर (Ω-m) है।

विशिष्ट प्रतिरोध का उपयोग किसी पदार्थ की चालकता को मापने के लिए किया जाता है। एक उच्च विशिष्ट प्रतिरोध वाले पदार्थ का अर्थ है कि वह विद्युत धारा को आसानी से नहीं बहने देता है, जबकि एक कम विशिष्ट प्रतिरोध वाले पदार्थ का अर्थ है कि वह विद्युत धारा को अच्छी तरह बहने देता है ।

विशिष्ट प्रतिरोध की गणना के लिए निम्नलिखित सूत्र का उपयोग किया जाता है: – ρ = R / (L * A)

जहाँ- ρ विशिष्ट प्रतिरोध है , R प्रतिरोध है , L लंबाई है , A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।

उदाहरण – यदि एक 1 मीटर लंबे और 1 वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट वाले तांबे के तार का प्रतिरोध 10 ओम है, तो उपयोग किए गए तांबे का विशिष्ट प्रतिरोध 10 Ω-m होगा।

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